सुना है बंद कर लीं उस ने आँखें कई रातों से वो सोया नहीं था
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चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें दिल पे आँखें रक्खें तेरी साँसें देखें
Tehzeeb Hafi
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन में रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?
Fareeha Naqvi
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आँखें देखूँ तो नज़र चेहरे से हट जाती है ऐसी औरत है मुकम्मल नहीं देखी जाती
Fareh Shujeeh
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हम हैं रहे-उम्मीद से बिल्कुल परे परे अब इंतिज़ार आप का कोई करे! करे! मैं ने तो यूँँ ही अपनी तबीयत सुनाई थी तुम तो लगीं सफाइयाँ देने, अरे! अरे!
Balmohan Pandey
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मैं सारी उम्र अँधेरों में काट सकता हूँ मेरे दियों को मगर रौशनी पराई न दे
Meraj Faizabadi
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बहुत सताते हैं वो रिश्ते जो टूट जाते हैं ख़ुदा किसी को भी तौफ़ीक़-ए-आशनाई न दे
Meraj Faizabadi
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जब तुझे रिश्ते निभाने का हुनर आ जाएगा तेरा दुश्मन ख़ुद ही चल कर तेरे घर आ जाएगा
Meraj Faizabadi
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जाने कब चुभ जाए आँखों में कोई बे-रहम सच आइना भी देखने वालो सँभल कर देखना
Meraj Faizabadi
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हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा
Meraj Faizabadi
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