शाम से पहले तिरी शाम न होने दूँगा ज़िन्दगी मैं तुझे नाकाम न होने दूँगा
Related Sher
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
267 likes
माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
67 likes
सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है
Nadeem Farrukh
62 likes
उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे
Kumar Vishwas
62 likes
More from Sabir Zafar
न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
Sabir Zafar
12 likes
शिकायत उस से नहीं अपने आपसे है मुझे वो बे-वफ़ा था तो मैं आस क्यूँँ लगा बैठा
Sabir Zafar
13 likes
वो क्यूँँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी बहुत ख़याल रखा था बहुत वफ़ा की थी
Sabir Zafar
30 likes
सुब्ह की सैर की करता हूँ तमन्ना शब भर दिन निकलता है तो बिस्तर में पड़ा रहता हूँ
Sabir Zafar
18 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sabir Zafar.
Similar Moods
More moods that pair well with Sabir Zafar's sher.







