sham se pahle teri sham na hone dunga zindagi main tujhe nakaam na hone dunga
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
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दो जहाँ की ज़िंदगी जीकर चले हैं दो घड़ी मरते-मरते फिर मुझे कुछ और मरने दीजिए
nakul kumar
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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शिकायत उस से नहीं अपने आपसे है मुझे वो बे-वफ़ा था तो मैं आस क्यूँँ लगा बैठा
Sabir Zafar
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न इंतिज़ार करो इनका ऐ अज़ा-दारो शहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते
Sabir Zafar
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शाम से पहले तिरी शाम न होने दूँगा ज़िन्दगी मैं तुझे नाकाम न होने दूँगा
Sabir Zafar
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सुब्ह की सैर की करता हूँ तमन्ना शब भर दिन निकलता है तो बिस्तर में पड़ा रहता हूँ
Sabir Zafar
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वो क्यूँँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी बहुत ख़याल रखा था बहुत वफ़ा की थी
Sabir Zafar
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