shab-e-visal lagaya jo un ko sine se to hans ke bole alag baithiye qarine se
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लिख के उँगली से धूल पे कोई ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई याद कर के किसी के चेहरे को रख गया होंठ फूल पे कोई
Sandeep Thakur
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जो तुम्हें मंज़िल पे ले जाएँगी वो राहें अलग हैं मैं वो रस्ता हूँ कि जिस पर तुम भटक कर आ गई हो
Harman Dinesh
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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या
Anand Raj Singh
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दिल तुम्हारा भी किसी से लगे तो तुम जानो किस तरह हँसते हुए ज़हर पिया जाता है
Harsh saxena
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न सहम कर न डर के छोड़ता है हंस तालाब मर के छोड़ता है वक़्त बर्बाद करने वालों को वक़्त, बर्बाद कर के छोड़ता है
Harman Dinesh
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