शराब खींची है सब ने ग़रीब के ख़ूँ से तू अब अमीर के ख़ूँ से शराब पैदा कर तू इंक़लाब की आमद का इंतिज़ार न कर जो हो सके तो अभी इंक़लाब पैदा कर
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ख़ूँ पिला कर जो शे'र पाला था उस ने सर्कस में नौकरी कर ली
Fahmi Badayuni
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मुझे शराब पिलाई गई है आँखों से मेरा नशा तो हज़ारों बरस में उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
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कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई आओ कहीं शराब पिएँ रात हो गई
Nida Fazli
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इलेक्शन तक ग़रीबों का वो हुजरा देखते हैं हुकूमत मिल गई तो सिर्फ़ मुजरा देखते हैं
Usman Minai
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हम हैं हिन्दी और हमारा मुल्क है हिन्दोस्ताँ हिन्द में पैदा तसव्वुफ़ के ज़बाँ-दाँ कीजिए
Sahir Dehlavi
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तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल से आह तर्क-ए-तमन्ना करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है
Asrar Ul Haq Majaz
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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर
Asrar Ul Haq Majaz
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सदा दी तू ने क्या जाने कहाँ से मगर मैं जानिब-ए-दिल देखता हूँ
Asrar Ul Haq Majaz
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