शे'र जो तुझ को कहे थे हम मनाने के लिए शे'र वो अब पढ़ रहे हैं हम कमाने के लिए
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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ज़रा मैं भी देखूँ वो दिल्ली चीज़ है क्या दोस्त जहाँ पे आ के मुझ को भूल गए
Irshad Siddique "Shibu"
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ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी
Irshad Siddique "Shibu"
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नईं मिलना गर भेज कोई फ़ोटो ही प्यासे को क़तरा भी बहुत होता है
Irshad Siddique "Shibu"
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हमीं देते हैं पत्थर को कोई चेहरा हमीं हैं पूजते शाम-ओ-सहर उस को
Irshad Siddique "Shibu"
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वफ़ा नाम पे सब दग़ा कर रहे हैं मोहब्बत से हम इस लिए डर रहे हैं ख़ुशी से कहाँ कोई है जी रहा अब ख़ुशी से तो सब ख़ुद-कुशी कर रहे हैं जवां हम हों माँ बाप बूढ़े हो जाएँ जवानी से हम इस लिए डर रहे हैं कि नादानी में इश्क़ कर बैठे थे,सो जवानी में अब शा'इरी कर रहे हैं
Irshad Siddique "Shibu"
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