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शे'र जो तुझ को कहे थे हम मनाने के लिए शे'र वो अब पढ़ रहे हैं हम कमाने के लिए

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ज़रा मैं भी देखूँ वो दिल्ली चीज़ है क्या दोस्त जहाँ पे आ के मुझ को भूल गए

Irshad Siddique "Shibu"

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ज़मीन है तुम सेे घर है बाबू जी वरना सब काग़ज़ भर है बाबू जी फख़्र से अपने सर को उठा के चलिए आप का लड़का शाइ'र है बाबू जी

Irshad Siddique "Shibu"

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नईं मिलना गर भेज कोई फ़ोटो ही प्यासे को क़तरा भी बहुत होता है

Irshad Siddique "Shibu"

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हमीं देते हैं पत्थर को कोई चेहरा हमीं हैं पूजते शाम-ओ-सहर उस को

Irshad Siddique "Shibu"

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वफ़ा नाम पे सब दग़ा कर रहे हैं मोहब्बत से हम इस लिए डर रहे हैं ख़ुशी से कहाँ कोई है जी रहा अब ख़ुशी से तो सब ख़ुद-कुशी कर रहे हैं जवां हम हों माँ बाप बूढ़े हो जाएँ जवानी से हम इस लिए डर रहे हैं कि नादानी में इश्क़ कर बैठे थे,सो जवानी में अब शा'इरी कर रहे हैं

Irshad Siddique "Shibu"

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