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शे'र कहने अलावा मेरे हाथ एक बूढ़े की बैसाखी भी है

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रस्सी चाक़ू कहते मुझ को अक्सर बेहतर होगा ग़लत क़दम उट्ठा ले

Jagveer Singh

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मज़हब पर आ जाए बात तो बस्ती जलती है रेप अगर हो तो सिर्फ़ मोमबत्ती जलती है

Jagveer Singh

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ज़िंदगी आगे निकल जानी हमारी यादें पीछे छूट जानी हैं तुम्हारी कोई भी रोए तो हम हँसते हैं यारों भावनाएँ मर गईं सारी की सारी

Jagveer Singh

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या अल्लाह लब पर हँसी दे मगर ख़ून में गर्मी भी दे मेरे दुख पे ख़ुश होने वाले ख़ुदा तुझ को भी ये ख़ुशी दे

Jagveer Singh

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वही हुआ है जो होना तय था जो तय है आगे वही होना ये मसअला क्यूँँ भला जो तय है वही हुआ उस पे क्या रोना अगर है बस में जो सब ख़ुदा के तो उस के बंदों तुम्हें क्या फ़िक्र हैं रिंद हम होना है जो भी गर हमारा हम से ही वो होना

Jagveer Singh

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