सुब्ह की ये सिलवटें खिलने कहाँ देती मुझे वो सिमट के बॉंह में, हिलने कहाँ देती मुझे
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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से
Faheem Jogapuri
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दो गज़ सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तू ने मुझे ज़मींदार कर दिया
Rahat Indori
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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रात भर जागना सही नइँ है मौत अबकी तू ही सुला मुझ को
RAAHI
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ज़िंदगी की सज़ा से बेहतर तो नेमत-ए-मौत ही मिली होती
RAAHI
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नाम मेरा शुरू है तेरे नाम के अंत से ये ख़ुदा का इशारा है हम दोनों के वास्ते
RAAHI
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याद-दिलबर और मिसरे वक़्त के मोहताज तो नइं हम सुख़न-वर और आशिक़, इस घड़ी का क्या करेंगे
RAAHI
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सुनो तुम आई थी क्या छत तरफ़ दिलबर मुहल्ले में सुना कल ईद होनी है
RAAHI
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