सुकून-ए-दिल नहीं मिलता विसाल-ए-यार में हर बार मियाँ इक रोज़ वो हम सेे मिली थी फिर न मिलने हेतु
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये क़ल्ब कहाँ रह पाता है तब काबू में जब बैठा करती है वो मेरे बाज़ू में
Sandeep dabral 'sendy'
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ये मानो न मानो यहाँ अपना कल सुन रहा है ये पढ़ने की इस उम्र में जो ग़ज़ल सुन रहा है
Sandeep dabral 'sendy'
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यार मुकम्मल हो न सका अफ़साना जिन का भी उन को बात मुहब्बत की बे-मतलब लगती है
Sandeep dabral 'sendy'
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तिफ़्ल थे जब हम हमारे दिल पे इतने पर्दे नइँ थे याँ सभी कुछ था मगर चेहरे पे इतने चेहरे नइँ थे नौकरी से पहले बिल्कुल मामला था याँ बराबर वो भी इतने महँगे नइँ थे हम भी इतने सस्ते नइँ थे
Sandeep dabral 'sendy'
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उस के झुमके औ बाली फिर से नाराज़ न हो जाएँ नज़र हटाई हम ने ठोड़ी के तिल से धीरे धीरे
Sandeep dabral 'sendy'
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