उस के झुमके औ बाली फिर से नाराज़ न हो जाएँ नज़र हटाई हम ने ठोड़ी के तिल से धीरे धीरे
Related Sher
तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
1279 likes
तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
Sandeep Thakur
90 likes
इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
87 likes
सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले
Umair Najmi
87 likes
दो जहाँ की ज़िंदगी जीकर चले हैं दो घड़ी मरते-मरते फिर मुझे कुछ और मरने दीजिए
nakul kumar
83 likes
More from Sandeep dabral 'sendy'
यार अनोखा जादू है याँ उस की कोमल बाँहों में मुरझाए चेहरे खिल जाते हैं बस इक आलिंगन से
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
यार अगर वो हाँ कह दे तो ख़ुद को आऊँ सौंप उसे झुमका तो बस मामूली नज़राना है उस की ख़ातिर
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
वो भी क्या दिन थे जब घंटों तक बातें हुआ करती थी आवाज़ तिरी सुनने को कान मिरे अब तरस गए हैं
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
याँ जिस के इंतिज़ार में ज़ाया' की अपनी सारी उम्र उस ने ही मुझ को याद के यहाँ क़ाबिल तक नइँ समझा
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
यादों के जंगल में आता नइँ याँ गाहे पतझड़ का मौसम सो बूढ़ी आँखों में भी यादों के पेड़ हरे भरे मिलते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sandeep dabral 'sendy'.
Similar Moods
More moods that pair well with Sandeep dabral 'sendy''s sher.







