तिफ़्ल थे जब हम हमारे दिल पे इतने पर्दे नइँ थे याँ सभी कुछ था मगर चेहरे पे इतने चेहरे नइँ थे नौकरी से पहले बिल्कुल मामला था याँ बराबर वो भी इतने महँगे नइँ थे हम भी इतने सस्ते नइँ थे
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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यार अनोखा जादू है याँ उस की कोमल बाँहों में मुरझाए चेहरे खिल जाते हैं बस इक आलिंगन से
Sandeep dabral 'sendy'
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यार अगर वो हाँ कह दे तो ख़ुद को आऊँ सौंप उसे झुमका तो बस मामूली नज़राना है उस की ख़ातिर
Sandeep dabral 'sendy'
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वो भी क्या दिन थे जब घंटों तक बातें हुआ करती थी आवाज़ तिरी सुनने को कान मिरे अब तरस गए हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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याँ जिस के इंतिज़ार में ज़ाया' की अपनी सारी उम्र उस ने ही मुझ को याद के यहाँ क़ाबिल तक नइँ समझा
Sandeep dabral 'sendy'
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यादों के जंगल में आता नइँ याँ गाहे पतझड़ का मौसम सो बूढ़ी आँखों में भी यादों के पेड़ हरे भरे मिलते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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