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सुना है झूट लिखकर वो बड़ा मशहूर है साहब जो होगा सामना सच से तो लिखना भूल जाएगा

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सख़्त मुश्किल है ये सफ़र मेरा कैसे होगा गुज़र-बसर मेरा वक़्त ने भी सितम किया मुझ पर छीनकर के अज़ीज़-तर मेरा छाँव देता था जो मुझे वो भी है ख़िज़ाँ दीदा अब शजर मेरा हो इजाज़त जहाँ से जाने की था यहीं तक मियाँ सफ़र मेरा जिन से आगे निकल गया मैं वो काटना चाहते हैं पर मेरा साँवरे मुझ को भूल मत जाना तेरा दर ही है अब तो घर मेरा कैसे कह दूँ कुमार मैं तुम सेे हाए जीवन है मुख़्तसर मेरा

Kumar Aryan

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तानसेन आप हो तो हो मैं तो बावरा हूँ बावरा

Kumar Aryan

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मैं खड़ा आज भी हूँ राह-गुज़र पर उन की छोड़ के चल भी दिए छोड़ के जाने वाले

Kumar Aryan

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सुनाता है वो अफ़साना तुम्हारा भला कैसा है दीवाना तुम्हारा तुम्हें जो प्रेम करता था उसे तो खला होगा बहुत जाना तुम्हारा

Kumar Aryan

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वो अगर चाहे तो मुझ को छोड़ सकता है मगर आख़िरी दम तक उसे मैं छोड़ने वाला नहीं

Kumar Aryan

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