सख़्ती थोड़ी लाज़िम है पर पत्थर होना ठीक नहीं हिन्दू मुस्लिम ठीक है साहब कट्टर होना ठीक नहीं
Related Sher
अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
221 likes
क़स में, वादे, दरवाज़े तो ठीक हैं पर ख़ामोशी को तोड़ नहीं सकता हूँ मैं
Tanoj Dadhich
69 likes
पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
nakul kumar
69 likes
क्या है जो हो गया हूँ मैं थोड़ा बहुत ख़राब थोड़ा बहुत ख़राब तो होना भी चाहिए
Jawwad Sheikh
64 likes
लाखों सद में ढेरों ग़म फिर भी नहीं हैं आँखें नम इक मुद्दत से रोए नहीं क्या पत्थर के हो गए हम
Azm Shakri
60 likes
More from Salman Zafar
अना को अपनी समझाना पड़ेगा बुलाती है, तो फिर जाना पड़ेगा
Salman Zafar
29 likes
ख़ुशबुओं से नहा के चाँद आया किस क़दर जगमगा के चाँद आया बद-नसीबी है मेरी आँखों की मास्क मुँह पे लगा के चाँद आया
Salman Zafar
32 likes
छोड़ कर जाने का मंज़र याद है हर सितम तेरा सितमगर याद है अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर अब भी तेरा रोल नंबर याद है
Salman Zafar
37 likes
उन के बच्चे यूँँ ही मुरझाएँगे बैठे बैठे ये जो मज़दूर हैं क्या खाएँगे बैठे बैठे
Salman Zafar
37 likes
अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर अब भी तेरा रोल नंबर याद है
Salman Zafar
41 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Salman Zafar.
Similar Moods
More moods that pair well with Salman Zafar's sher.







