छोड़ कर जाने का मंज़र याद है हर सितम तेरा सितमगर याद है अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर अब भी तेरा रोल नंबर याद है
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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ख़ुशबुओं से नहा के चाँद आया किस क़दर जगमगा के चाँद आया बद-नसीबी है मेरी आँखों की मास्क मुँह पे लगा के चाँद आया
Salman Zafar
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उन के बच्चे यूँँ ही मुरझाएँगे बैठे बैठे ये जो मज़दूर हैं क्या खाएँगे बैठे बैठे
Salman Zafar
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अना को अपनी समझाना पड़ेगा बुलाती है, तो फिर जाना पड़ेगा
Salman Zafar
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सख़्ती थोड़ी लाज़िम है पर पत्थर होना ठीक नहीं हिन्दू मुस्लिम ठीक है साहब कट्टर होना ठीक नहीं
Salman Zafar
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दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
Salman Zafar
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