दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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तूफ़ानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
Rahat Indori
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अना को अपनी समझाना पड़ेगा बुलाती है, तो फिर जाना पड़ेगा
Salman Zafar
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छोड़ कर जाने का मंज़र याद है हर सितम तेरा सितमगर याद है अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर अब भी तेरा रोल नंबर याद है
Salman Zafar
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ख़ुशबुओं से नहा के चाँद आया किस क़दर जगमगा के चाँद आया बद-नसीबी है मेरी आँखों की मास्क मुँह पे लगा के चाँद आया
Salman Zafar
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उन के बच्चे यूँँ ही मुरझाएँगे बैठे बैठे ये जो मज़दूर हैं क्या खाएँगे बैठे बैठे
Salman Zafar
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अपना बचपन भूल बैठा हूँ मगर अब भी तेरा रोल नंबर याद है
Salman Zafar
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