सुना रक़ीब तवज्जोह न अब उन्हें देते इसी लिए वो हमारे क़रीब आए हैं
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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जब चाहें सो जाते थे हम, तुम सेे बातें कर के तब उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शे'र सुनाए उस को जब पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इस का मतलब?
Tanoj Dadhich
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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं बस इक लड़की का बोसा लौटाना है
Rohit Gustakh
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हमें गूंगा न समझा जाए कमतर बोलते हैं हम जहाँ हम को सुना जाए वहीं पर बोलते हैं हम
Bhaskar Shukla
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ये क़ल्ब कहाँ रह पाता है तब काबू में जब बैठा करती है वो मेरे बाज़ू में
Sandeep dabral 'sendy'
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वो ही उन को आधी रात सड़क पर छोड़ चला इक रोज़ यहाँ जिस ने गाहे रात गुज़ारी थी उन की आँखों के साए में
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त रहते लौट आना देर तुम सेे हो न जाए बा'द में हो वक़्त ज़्यादा पर कहीं हम हों न जग में
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त लगता है नतीजों को यहाँ आने में अक्स दिखता न कभी चलते हुए पानी में
Sandeep dabral 'sendy'
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वक़्त कहाँ लगता है याँ क्या से क्या होने में जैसे नइँ लगता है याँ, 'है' से 'था' होने में
Sandeep dabral 'sendy'
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