sherKuch Alfaaz

सुना रक़ीब तवज्जोह न अब उन्हें देते इसी लिए वो हमारे क़रीब आए हैं

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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो

Tehzeeb Hafi

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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

Ali Zaryoun

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जब चाहें सो जाते थे हम, तुम सेे बातें कर के तब उल्टी गिनती गिनने से भी नींद नहीं आती है अब इश्क़ मुहब्बत पर ग़ालिब के शे'र सुनाए उस को जब पहले थोड़ा शरमाई वो फिर बोली इस का मतलब?

Tanoj Dadhich

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उल्फ़त से दुनिया का बैर पुराना है फिर भी दीवाने को शे'र सुनाना है सबका कर्ज अदा कर के लौटा हूँ मैं बस इक लड़की का बोसा लौटाना है

Rohit Gustakh

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हमें गूंगा न समझा जाए कमतर बोलते हैं हम जहाँ हम को सुना जाए वहीं पर बोलते हैं हम

Bhaskar Shukla

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