वो ही उन को आधी रात सड़क पर छोड़ चला इक रोज़ यहाँ जिस ने गाहे रात गुज़ारी थी उन की आँखों के साए में
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तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती
Ankita Singh
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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तुम मेरी तरफ़ देखना छोड़ो तो बताऊँ हर शख़्स तुम्हारी ही तरफ़ देख रहा है
Waseem Barelvi
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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वो कहते थे गर बिछड़े तो मर जाएँगे हम पर कल हम ने उन को हँसते गाते हुए देखा
Sandeep dabral 'sendy'
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वीडियो गेम के शौक़ीन हुए जब से हम अब मज़ा आता नहीं बच्चों की शैतानी में
Sandeep dabral 'sendy'
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वस्त ये जो दूरी है इस को अब कम करते हैं चलिए मैं और आप मिलाकर अब हम करते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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यार मुकम्मल हो न सका अफ़साना जिन का भी उन को बात मुहब्बत की बे-मतलब लगती है
Sandeep dabral 'sendy'
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तुम जिस के साथ देखते हो याँ अपने घर के सपने अक्सर वो लड़की देखा करती है अफ़सर के सपने इक रोज़ हिज्र अपने शबाब पर होगा और पूछो मत तुम देखते रहोगे फिर केवल नामा-बर के सपने
Sandeep dabral 'sendy'
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