सुनाई दास्ताँ-ए-दर्द-ए-दिल जो महफ़िल में तो लोग कहने लगे वाह वाह क्या कहने
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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ज़ख़्म ये उन को भी दिखाना है जो समझते हैं सब फ़साना है
Akash Rajpoot
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ज़ख़्म पुराने भर जाएँगे जब भी, दुनिया देखेंगे सारी दुनिया याद करेगी ऐसी दुनिया देखेंगे एक दफ़ा दिल टूट गया तो हार नहीं ना मानेंगे फिर से इश्क़ करेंगे यारों, हम भी दुनिया देखेंगे
Akash Rajpoot
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तिरे जाने से मैं तन्हा नहीं था तुम्हारी याद ने तन्हा किया है
Akash Rajpoot
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अभी तक याद है वो दिन कि जब महबूब रोए थे लिपट कर के गले से उन के हम भी खूब रोए थे
Akash Rajpoot
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कोई ग़म है न सितम है न ही तन्हाई है हम को फ़ुर्सत है कि हम याद तुम्हें करते हैं
Akash Rajpoot
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