अभी तक याद है वो दिन कि जब महबूब रोए थे लिपट कर के गले से उन के हम भी खूब रोए थे
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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ज़माने वो नहीं हैं अब मुहब्बत देखते थे सब करेगी इश्क़ जो मुझ सेे मिरी तनख़्वाह देखेगी
Akash Rajpoot
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ज़माने से नहीं बनती मगर हाँ ख़ुदा से ख़ूब बनती है हमारी
Akash Rajpoot
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वफा के हुस्न के काँटों के फूल के क़िस्से मुझे तो लग रहे हैं सब फ़ुज़ूल के क़िस्से फिर उस का नाम है आया ज़बान पर मेरी सुना रहा था किसी को स्कूल के क़िस्से
Akash Rajpoot
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तुम्हारे नाम से धड़का हुआ दिल बहुत मँहगा बिका टूटा हुआ दिल तुम्हारे साथ था तो था तुम्हारा तुम्हारे बा'द ये सबका हुआ दिल
Akash Rajpoot
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मैं अब भी ख़ुश हो जाता हूँ त्योहारों की छुट्टी में कि कम से कम त्योहारों में घर जाने को मिलता है
Akash Rajpoot
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