वफा के हुस्न के काँटों के फूल के क़िस्से मुझे तो लग रहे हैं सब फ़ुज़ूल के क़िस्से फिर उस का नाम है आया ज़बान पर मेरी सुना रहा था किसी को स्कूल के क़िस्से
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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ज़माने वो नहीं हैं अब मुहब्बत देखते थे सब करेगी इश्क़ जो मुझ सेे मिरी तनख़्वाह देखेगी
Akash Rajpoot
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ज़माने से नहीं बनती मगर हाँ ख़ुदा से ख़ूब बनती है हमारी
Akash Rajpoot
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ज़ख़्म ये उन को भी दिखाना है जो समझते हैं सब फ़साना है
Akash Rajpoot
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वो मुझ को छोड़ कर के क्या गया है सफ़र में नींद अब आने लगी है
Akash Rajpoot
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हर बात हर किसी को बताया न कीजिए हम सेे मगर निगाहें चुराया न कीजिए आग़ोश में आ कर के बहक जाए ना कहीं हर शख़्स को गले से लगाया न कीजिए
Akash Rajpoot
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