सूरज को आता है बस पैकर को ही जलाना पर चाँद तो कईयों के दिल जला चुका है
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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चाँद सा मिस्रा अकेला है मिरे काग़ज़ पर छत पे आ जाओ मिरा शे'र मुकम्मल कर दो
Bashir Badr
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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मेरे होंटों पे किसी लम्स की ख़्वाहिश है शदीद ऐसा कुछ कर मुझे सिगरेट को जलाना न पड़े
Umair Najmi
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ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
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ये ज़िन्दगी की दौड़ दौड़कर मिला ही क्या हमें न जीता शख़्स घर जा पाता है न हारा शख़्स ही
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उन का क़ब्ज़ा है दिल पे मेरे ज़िंदा रहना अब मुश्किल है
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वो तो दिल जैसा धड़कता है मेरे सीने में दम निकल जाएगा जब दूर चला जाएगा
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तल्ख़ लहजा लबों से अपने उतारा आख़िर ज़ोम उस का मेरे एहसानों से हारा आख़िर
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