suraj hun zindagi ki ramaq chhod jaunga main dub bhi gaya to shafaq chhod jaunga
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
Iqbal Sajid
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सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा
Iqbal Sajid
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मारा किसी ने संग तो ठोकर लगी मुझे देखा तो आसमाँ था ज़मीं पर पड़ा हुआ
Iqbal Sajid
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मिले मुझे भी अगर कोई शाम फ़ुर्सत की मैं क्या हूँ कौन हूँ सोचूँगा अपने बारे में
Iqbal Sajid
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पिछले बरस भी बोई थीं लफ़्ज़ों की खेतियाँ अब के बरस भी इस के सिवा कुछ नहीं किया
Iqbal Sajid
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