तअल्लुक़ आज़माइश से रहा है ज़िंदगी भर यूँँ जहाँ पहुँचे मेरा लशकर वो दरिया सूख जाता है
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे अपनी दुनिया बुरी लग गई जिस को आबाद करते हुए मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई
Tehzeeb Hafi
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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यूँँ तो अम्मी हैं मेरी ढूँढ़ के तुम को लाईं तुम अगर यूँँ भी कहीं मिलती पसंद आ जाती
Amaan Javed
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हुस्न की तौहीन कर दी वक़्त की बर्बादी की तेरे ठुकराए हुओ ने किस सेे किस सेे शादी की
Amaan Javed
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उम्मीद किसी को कभी झूठी नहीं दी है सब कुछ दिया तोहफ़े में अँगूठी नहीं दी है
Amaan Javed
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कोई तो है जो मेरे कान में ये कह गया है तू अपनी राह में दीवार बन के रह गया है
Amaan Javed
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आती है बैठे बैठे तेरी याद इस तरह आता है जैसे याद बुज़ुर्गों को लखनऊ
Amaan Javed
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