तमाम ज़िन्दगी ये बात मैं न भूलूँगा किसी ने याद न रक्खा ये याद रक्खूँगा
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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यूँँ पाँव पाँव चला उम्र भर मगर देखो चला जहाँ से था मैं लौट के वहीं पहुँचा नहीं ये बात नहीं तय सफ़र किया ही नहीं रहा सफ़र में ही फिर भी कहीं नहीं पहुँचा
Mohit Subran
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तिरी दौलत का जादू है जो तुझ तक खींच लाया है वगरना भाई मेरे सुन ये तेरी भी नहीं होती
Mohit Subran
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वो हादसा जो नहीं बीता है अभी मुझ पर उसी के ख़ौफ़ से दिल मेरा ख़ौफ़ खाता है
Mohit Subran
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सुनता है भला कौन यहाँ दर्द किसी का मैं ख़ुश था चलो मेरी परेशानी को पूछा उस वक़्त इन आँखों में मिरी पानी भर आया जब शहर में मुझ से किसी ने पानी को पूछा
Mohit Subran
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