तन्हाई से चौंके जो कभी ख़ुद को पुकारा ख़ामोशी से घबराए तो ज़ंजीर हिला दी
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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पहले उस की ख़ुशबू मैं ने ख़ुद पर तारी की फिर मैं ने उस फूल से मिलने की तैयारी की इतना दुख था मुझ को तेरे लौट के जाने का मैं ने घर के दरवाज़ों से भी मुँह मारी की
Tehzeeb Hafi
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को
Naseer Turabi
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मैं पीछे भागने वालों में सब से आगे हूँ ये मेरी आख़िरी कोशिश है ख़ुद को पाने की
Abbas Qamar
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जब तक जला ये हम भी जले इस के साथ साथ जब बुझ गया चराग़ तो सोना पड़े हमें
Abbas Qamar
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हालत-ए-हाल से बेगाना बना रक्खा है ख़ुद को माज़ी का निहाँ-ख़ाना बना रक्खा है
Abbas Qamar
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इस क़दर जज़्ब हो गए दोनों दर्द खेंचूँ तो दिल निकल आए
Abbas Qamar
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हम आसमाँ के लोग थे जन्नत से आए थे ख़ुद को मगर ज़मीं में बोना पड़ा हमें
Abbas Qamar
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