टैंक आगे बढ़ें कि पीछे हटें कोख धरती की बाँझ होती है
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तन्हाई ये तंज करे है तन्हा क्यूँ है यार कहाँ है आगे पीछे चलने वाले
Vishal Singh Tabish
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मुनव्वर माँ के आगे यूँँ कभी खुल कर नहीं रोना जहाँ बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती
Munawwar Rana
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ख़ाली पड़ा है और उदासी भरा है दिल सो लोग इस मकान से आगे निकल गए
Ankit Maurya
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पहले थोड़ी मुश्किल होगी आगे लेकिन मंज़िल होगी सब बाराती शाइ'र होंगे मेरी शादी महफ़िल होगी
Tanoj Dadhich
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जिन्हें सब लोग गूँगा बोलते हैं मेरे आगे वो ऊँचा बोलते हैं ख़मोशी बोलने वालों की सफ़ में हमीं सब सेे ज़ियादा बोलते हैं
Ashutosh Vdyarthi
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फ़क़ीर-ए-शहर के तन पर लिबास बाक़ी है अमीर-ए-शहर के अरमाँ अभी कहाँ निकले
Sahir Ludhianvi
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बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो बहुत दुख सह लिए मैं ने बहुत दिन जी लिया मैं ने
Sahir Ludhianvi
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नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
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तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम
Sahir Ludhianvi
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रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने
Sahir Ludhianvi
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