तरकीब हज़ारों हैं लेकिन बोसा पहले नंबर पर पेशानी पर ले लो जब ग़ुस्सा रहता है अंबर पर
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ये क़ल्ब कहाँ रह पाता है तब काबू में जब बैठा करती है वो मेरे बाज़ू में
Sandeep dabral 'sendy'
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ये मानो न मानो यहाँ अपना कल सुन रहा है ये पढ़ने की इस उम्र में जो ग़ज़ल सुन रहा है
Sandeep dabral 'sendy'
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उस को भी कोई छोटा-मोटा रहज़न घोषित करवा दो मालूम नहीं है कितनों को मुस्कान से लूटा है अपनी
Sandeep dabral 'sendy'
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उस के झुमके औ बाली फिर से नाराज़ न हो जाएँ नज़र हटाई हम ने ठोड़ी के तिल से धीरे धीरे
Sandeep dabral 'sendy'
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तिफ़्ल थे जब हम हमारे दिल पे इतने पर्दे नइँ थे याँ सभी कुछ था मगर चेहरे पे इतने चेहरे नइँ थे नौकरी से पहले बिल्कुल मामला था याँ बराबर वो भी इतने महँगे नइँ थे हम भी इतने सस्ते नइँ थे
Sandeep dabral 'sendy'
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