तस्वीर-ए-यार है इसे रखना सँभाल कर इक बार खो गई तो दोबारा न दूँगा मैं
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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जौन तुम्हें ये दौर मुबारक, दूर ग़म-ए-अय्याम से हो एक पागल लड़की को भुला कर अब तो बड़े आराम से हो
Jaun Elia
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीक़े से मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
Waseem Barelvi
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राम होने में या रावण में है अंतर इतना एक दुनिया को ख़ुशी दूसरा ग़म देता है हम ने रावण को बरस दर बरस जलाया है कौन है वो जो इसे फिर से जनम देता है
Kumar Vishwas
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एजाज़-ए-शायरी कहो अपनी ज़बान से ख़स्ता सोहेल शे'र सुनाओ न तुम कभी
Shaikh Sohail
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हर इक अल्फ़ाज़ में बस तू समाएँ वगरना ये सुख़न हम कह न पाएँ कभी इस क़ितआ का मिसरा रहे तू कभी ग़ज़लों में तुझ को हम छुपाएँ
Shaikh Sohail
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दिल को मेरे ख़ुदा अभी ताब-ए-सुख़न नहीं लिखने चला हूँ वस्फ़-ए-रूख़-ए-यार देख कर
Shaikh Sohail
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करवट बदल बदल कर सोचूँ तुम्हें मैं शब भर तुम चैन से किसी के ख़्वाबों को बुन रहे हो
Shaikh Sohail
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जलता नहीं हूँ आतिश-ए-रुख़सार देख कर करता हूँ नाज़ ताक़त-ए-दीदार देख कर
Shaikh Sohail
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