तेरे जैसा बना मुझ को दग़ाबाज़ी में माहिर कर
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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थोड़ा उलझे मसाइल-ए-दिल में कुछ परेशाँ दिमाग़ ने किया था रात से जंग जीत जाते मगर ये अँधेरा चराग़ ने किया था
Prit
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बात अच्छी लगी तो आऊँगा वरना मेरे बदन से बात करें
Prit
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वैसे तो सारा जहाँ उन का है लेकिन इक क़ौल पे बे-घर हैं राम
Prit
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कोई पलटे भी इस को तो कैसे दर्द का उल्टा भी तो दर्द ही है
Prit
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जिस्म छलनी हो चुका है रूह घाइल हो चुकी है प्यार में कान्हा के मीरा कितनी पागल हो चुकी है तेरे दर्शन की तमन्ना में निकल आई है घर से ज़हर पी कर प्रेम बरसाए वो बादल हो चुकी है
Prit
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