sherKuch Alfaaz

जिस्म छलनी हो चुका है रूह घाइल हो चुकी है प्यार में कान्हा के मीरा कितनी पागल हो चुकी है तेरे दर्शन की तमन्ना में निकल आई है घर से ज़हर पी कर प्रेम बरसाए वो बादल हो चुकी है

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