पास थे हम मगर कुछ ऐसे थे जनवरी थी वो मैं दिसंबर था
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बात अच्छी लगी तो आऊँगा वरना मेरे बदन से बात करें
Prit
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उसे बिन देखे देख लेते हैं हम वो हमें देख कर भी देखती नइँ
Prit
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मिज़ाज़ी इश्क़ मेरा तब हक़ीक़ी ही हो गया जो ज़िंदगी में नहीं वो ही ज़िंदगी हो गया
Prit
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मरे भी तो तड़प तड़प के मरे ज़िंदगी भी हलाल में गुज़री
Prit
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थोड़ा उलझे मसाइल-ए-दिल में कुछ परेशाँ दिमाग़ ने किया था रात से जंग जीत जाते मगर ये अँधेरा चराग़ ने किया था
Prit
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