कोई पलटे भी इस को तो कैसे दर्द का उल्टा भी तो दर्द ही है
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
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शिफ़ा की बात आए तो सुख़न की मार मिलती है दिल-ए-बीमार को उम्मीद भी बीमार मिलती है
Prit
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'प्रीत' जिस तिस बहाने कर भी ले एक तितली से बात फूलों की
Prit
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थोड़ा उलझे मसाइल-ए-दिल में कुछ परेशाँ दिमाग़ ने किया था रात से जंग जीत जाते मगर ये अँधेरा चराग़ ने किया था
Prit
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कभी ब्याही थी बेटियाँ हम ने कभी की थी ज़कात फूलों की
Prit
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उसे हर वक़्त करता हूँ महसूस वो जिसे आज तक छुआ ही नहीं
Prit
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