तेरे पहलू में गुज़रे जान-ए-जानाँ मेरे हिस्से की जितनी ज़िन्दगी है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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कोई मेरा साथी बन जाए अंधे की लाठी बन जाए मात पिता को ऐसे पूजो सारा घर काशी बन जाए
Ashok Sagar
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तेरी घड़ी का क़ुसूर क्या जब समय ही मेरा ख़राब है तो
Ashok Sagar
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क्या गुरबत के क़िस्से भी छपते हैं अख़बारों में हम ने साँसों को भी बिकते देखा है गुब्बारों में
Ashok Sagar
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क्या भेज दूँ मैं सीने से दिल ही निकाल के ख़त में गुलाब भेजा है मेरे गुलाब ने
Ashok Sagar
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फर्ज़ ओ सुन्नत तो पहले अदा कीजिए फिर ये कहना के मौला अता कीजिए
Ashok Sagar
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