तेरे शहर से मेरा भी नाता है कोई मुझ सेा यूँँ ही नहीं यहाँ आता है कोई तेरे बा'द मैं गायब सा हूँ इक मुझ में ही मुझ को तेरे सिवा कहाँ भाता है कोई
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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ये दुख दर्द मेरे सीने से नइँ जाता मैं घर पर हूँ बाबा काम पे जाते हैं
Pankaj murenvi
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यार क़यामत हैं उस की आँखें दिल की चाहत हैं उस की आँखें सब ढूँढ़ते है मय-ख़ाना दुख में मेरी राहत हैं उस की आँखें
Pankaj murenvi
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तुम भी मेरे जैसे तन्हा लगते हो तुम भी मोहब्बत में दिल से हारे हो
Pankaj murenvi
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वो तेरा देखना झुकी नज़रों से यार मुहब्बत से छीन लेगा मुझ को ही तू है मुझ सेे यार मुहब्बत से नहीं है इतना आसान जीतना फिर भी करने को मैं देखूँगा हासिल तुझ को ही तुझ सेे यार मुहब्बत से
Pankaj murenvi
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नज़र में है मुहब्बत बस हमारे तो मुहब्बत भर के ही देखा करेंगे हम
Pankaj murenvi
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