ये दुख दर्द मेरे सीने से नइँ जाता मैं घर पर हूँ बाबा काम पे जाते हैं
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ज़ख़्म तिरे हैं जो सब पाले हुए रखे हैं मैं ने वो कुछ ख़त अब तक भी सँभाले हुए रखे हैं मैं ने
Pankaj murenvi
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ज़ख़्म दिल पर जो मुहब्बत में लगे नाकामियों के उन में से इक-आध सिल जाए अगर तुम लौट आओ
Pankaj murenvi
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यूँँ तो व्याकुल है हम से बात करने को वो लेकिन लफ़्ज़ मुहब्बत के मिलते नइँ उस को
Pankaj murenvi
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शख़्स मिले इक मुझ को मेरा जैसा ही मुझ को मुझ से बेहतर की उम्मीद नहीं
Pankaj murenvi
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नज़र में है मुहब्बत बस हमारे तो मुहब्बत भर के ही देखा करेंगे हम
Pankaj murenvi
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