तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरे कहने से ये जादू नहीं होने वाला अब सितारा कोई जुगनू नहीं होने वाला फिर भी बेताब हूँ कितना मैं तेरा होने को जानता हूँ कि मेरा तू नहीं होने वाला
Varun Anand
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मेरे क़ुबूल पे उस ने क़ुबूल कह तो दिया पर एक बार कहा उस ने तीन बार नहीं
Varun Anand
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न जाने कौन सी आए सदा पसंद उसे सो हम सदाएँ बदल कर सदाएँ देते रहे
Varun Anand
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ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से
Varun Anand
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हाकिम को इक चिट्ठी लिक्खो सब के सब और उस में बस इतना लिखना लानत है
Varun Anand
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