तेज़ कितनी भी सियासत हो मगर दम तोड़ती है गुफ़्तगू कोई सियासी बारहा मुँह मोड़ती है
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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मुझ सेे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ सेे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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लेता नहीं जो साँस भी इक बार चैन से करता रहा है गुफ़्तगू बीयर की कैन से
nakul kumar
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तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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तुम भी वैसे थे मगर तुम को ख़ुदा रहने दिया इस तरह तुम को ज़माने से जुदा रहने दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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याज़ कोई भी रहे दीवानगी भी चाहिए मसअले हालात वर्ना आज भी प्रतिकूल हैं
Manohar Shimpi
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सच बताओं मर्सिया-ख़्वानी किसे मालूम है आँख से बहता हुआ पानी किसे मालूम है
Manohar Shimpi
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वक़्त आता और जाता है "मनोहर" फिर ग़म-ए-दिल और शिकवा क्यूँँ रहे है
Manohar Shimpi
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वहम करना अगर बुराई है तंज कसना कहाँ भलाई है
Manohar Shimpi
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वीरान यारों घर हुआ है अब वहाँ ख़ुशहाल था जर्जर हुआ है अब वहाँ
Manohar Shimpi
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