था नहीं काम कुछ भी कर ली तबाह ज़िंदगी जीने को थी कर ली तबाह ढूँढ़ते फिरते अहल-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा हम ने अपनी जवानी कर ली तबाह
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये मिरी ज़िंदगी ये कुछ भी नहीं बोझ है मुझ को ढो रहा हूँ मैं
Chandan Sharma
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ज़िंदगी बे-ख़बर रही मुझ से ऐसे की ज़िंदगी बसर मैं ने अपने अंदर तुझे बसाया और ढूँढ़ा फिर ख़ुद को दर-ब-दर मैं ने
Chandan Sharma
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मैं क्यूँ कर बढ़ाऊँ तेरी उलझनें जान मैं क्यूँ कर करूँँ तुझ से इज़हार-ए-उल्फ़त
Chandan Sharma
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तेरे बा'द भी आईं और गईं कितनी ही हसीनाएँ जान मैं ने लेकिन हिज्र के ग़म का वो भौकाल बनाए रक्खा तेरे लौट आने का इस दिल को अरसों तक वहम रहा दोस्त सो बरसों मैं ने भी अपनी दाढ़ी बाल बनाए रक्खा
Chandan Sharma
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मुहब्बत या हवस में था अभी तक मैं किस के दस्तरस में था अभी तक
Chandan Sharma
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