thakna bhi lazmi tha kuchh kaam karte karte kuchh aur thak gaya hun aaram karte karte
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ख़ुद को तरतीब दिया आख़िर-ए-कार अज़-सर-ए-नौ ज़िंदगी में तेरा इन्कार बहुत काम आया
Zafar Iqbal
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काम आई न कुछ दानिश-ओ-दानाई हमारी हारी है तेरे झूठ से सच्चाई हमारी यूँँ है कि यहाँ नाम-ओ-निशाँ तक नहीं तेरा और तुझ से भरी रहती है तन्हाई हमारी
Zafar Iqbal
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वो सूरत देख ली हम ने तो फिर कुछ भी न देखा अभी वर्ना पड़ी थी एक दुनिया देखने को
Zafar Iqbal
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बदन का सारा लहू खिंच के आ गया रुख़ पर वो एक बोसा हमें दे के सुर्ख़-रू है बहुत
Zafar Iqbal
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जो यहाँ ख़ुद ही लगा रक्खी है चारों जानिब एक दिन हम ने इसी आग में जल जाना है
Zafar Iqbal
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