बदन का सारा लहू खिंच के आ गया रुख़ पर वो एक बोसा हमें दे के सुर्ख़-रू है बहुत
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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वो सूरत देख ली हम ने तो फिर कुछ भी न देखा अभी वर्ना पड़ी थी एक दुनिया देखने को
Zafar Iqbal
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काम आई न कुछ दानिश-ओ-दानाई हमारी हारी है तेरे झूठ से सच्चाई हमारी यूँँ है कि यहाँ नाम-ओ-निशाँ तक नहीं तेरा और तुझ से भरी रहती है तन्हाई हमारी
Zafar Iqbal
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तुम ही बतलाओ कि उस की क़द्र क्या होगी तुम्हें जो मोहब्बत मुफ़्त में मिल जाए आसानी के साथ
Zafar Iqbal
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मौत के साथ हुई है मिरी शादी सो 'ज़फ़र' उम्र के आख़िरी लम्हात में दूल्हा हुआ मैं
Zafar Iqbal
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ख़ुद को तरतीब दिया आख़िर-ए-कार अज़-सर-ए-नौ ज़िंदगी में तेरा इन्कार बहुत काम आया
Zafar Iqbal
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