sherKuch Alfaaz

थोड़ी सर्दी ज़रा सा नज़ला है शा'इरी का मिज़ाज पतला है

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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा

Azhar Iqbal

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ख़ुदा की शा'इरी होती है औरत जिसे पैरों तले रौंदा गया है तुम्हें दिल के चले जाने पे क्या ग़म तुम्हारा कौन सा अपना गया है

Ali Zaryoun

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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए

Mehshar Afridi

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रास्ते में फिर वही पैरों का चक्कर आ गया जनवरी गुज़रा नहीं था और दिसंबर आ गया

Rahat Indori

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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है

Zubair Ali Tabish

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