ठोकरें खाते हुए इक दरिया जा समुंदर में गिरा बिल-आख़िर
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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तूफ़ानों से आँख मिलाओ सैलाबों पे वार करो मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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वो रास्ते भी आज कई मंज़िला हुए मेरा जो रास्ता था ज़मीं पर नहीं रहा
Javed Aslam
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अजब है इम्तिहान-ए-ज़िंदगी 'असलम' जहाँ में इसी पर्चे में हल भी है इसी में मसअला है
Javed Aslam
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मुद्दआ' था जो हक़ीक़ी कि इता'अत करते उम्र लेकिन मिरी सारी कटी गुन-गानों में
Javed Aslam
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मतलब पेपर-वेट के जैसा होता है रिश्तों के काग़ज़ पे ये बैठा होता है
Javed Aslam
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उम्र हर शख़्स काट लेता है ज़िंदगी चंद लोग जीते हैं
Javed Aslam
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