तू भी मिरी चाहत में शामिल हो गई इक और भी नाक़ामी हासिल हो गई
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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तुम से इस दिल को तसल्ली है करें भी क्या हम हम से था इश्क़ जिसे हम ने उसे छोड़ दिया
Naresh sogarwal 'premi'
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ये समय जो है कि मुझ सेे अब तो कटता भी नहीं और ऐसा भी नहीं मैं जो कि लिख नहीं रहा
Naresh sogarwal 'premi'
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रहता हूँ आठों पहर तुझ में ही लेकिन मिलने को इक पास लम्हा भी नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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शख़्स जो रहता है हर पल मिरी रूह-ओ-जाँ में बद-नसीबी कि उसे मैं ने छुआ तक भी नहीं
Naresh sogarwal 'premi'
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उस की याद हम को और भी सताने वाली है जून का महीना है वसंत आने वाली है
Naresh sogarwal 'premi'
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