यूँँ तो ख़ामोश हूँ पर बात मैं भी करता हूँ मैं समुंदर हूँ ख़लल वक़्त पे ही करता हूँ
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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वो ही चेहरा वो ही आँखें वो ही दस्त-ओ-बाज़ू दर-ओ-दीवार न बदली न ही वो घर मेरा
Sanjay Bhat
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वो दिल से हो कर आँख से उतर गया इक आँसू था जो उम्र से गुज़र गया
Sanjay Bhat
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कहाँ ऐसे मरासिम थे कि कोई लौट के आता ख़िज़ाँ के फूल को ख़ूँ की नहीं अश्कों की हाजत थी
Sanjay Bhat
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मैं था ही क्या जो मुझ से कोई वफ़ा करता मेरा साथी बन कर मुझ से न जफ़ा करता पैदा किस दिल में कर पाया हूँ मैं उलझन होता ही नहीं मैं तो सब को न ख़फ़ा करता
Sanjay Bhat
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पिघलती है ये क़तरा क़तरा रंग अपना बदलती है तिरी गर्मी की जुंबिश से तमन्ना भी फिसलती है जवानी ख़त्म हो जाती है नादानी में जल जल के दिल-ए-नादाँ को बिल-आख़िर ये मिट्टी ही निगलती है
Sanjay Bhat
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