तुम जितना चाहो उतना उल्टा सीधा कर सकती हो हम को तो हर काम तुम्हारा बेहद अच्छा लगता है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़िन्दगी भर बस तिरी चाहत करेंगे जान ए मन बस तुझे अपनी दिली आदत करेंगे जान ए मन
Kaviraj " Madhukar"
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ज़रा वो पास क्या आने लगा मेरे मुझे लगने लगा सब मिल गया मुझ को
Kaviraj " Madhukar"
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ज़मीं को छोड़कर वो जा चुका पर अभी भी है दिलों में वो सभी के
Kaviraj " Madhukar"
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उसी पे दिल मिरा हारा बहुत है वही इक शख़्स तो प्यारा बहुत है किसी के आँसुओं से ही बना है समुन्दर ये तभी खारा बहुत है
Kaviraj " Madhukar"
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उसी में क्यूँ हुए हो गुम बताओ हमारे क्यूँ नहीं हो तुम बताओ
Kaviraj " Madhukar"
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