ज़िन्दगी भर बस तिरी चाहत करेंगे जान ए मन बस तुझे अपनी दिली आदत करेंगे जान ए मन
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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ज़रा वो पास क्या आने लगा मेरे मुझे लगने लगा सब मिल गया मुझ को
Kaviraj " Madhukar"
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यूँँ तो बहुत है काम पर करना मुझे बस इश्क़ हैं
Kaviraj " Madhukar"
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वो जो मिरा हैं ही नहीं होता उसी का काश मैं
Kaviraj " Madhukar"
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ज़मीं को छोड़कर वो जा चुका पर अभी भी है दिलों में वो सभी के
Kaviraj " Madhukar"
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तुम्हारी आँख पे काजल जमें है यूँँ कि जैसे आसमाँ पे जम रहे बादल
Kaviraj " Madhukar"
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