तुम ने किस कैफ़ियत में मुख़ातब किया कैफ़ देता रहा लफ़्ज़-ए-'तू' देर तक
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ऐ आ समाँ किस लिए इस दर्जा बरहमी हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया
Ambreen Haseeb Ambar
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ऐ आसमाँ किस लिए इस दर्जा बरहमी हम ने तो तिरी सम्त इशारा नहीं किया
Ambreen Haseeb Ambar
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ज़िंदगी में कभी किसी को भी मैं ने चाहा नहीं मगर तुम को
Ambreen Haseeb Ambar
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जो तुम हो तो ये कैसे मान लूँ मैं कि जो कुछ है यहाँ बस इक गुमाँ है
Ambreen Haseeb Ambar
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क्या ख़ूब तमाशा है ये कार-गह-ए-हस्ती हर जिस्म सलामत है हर ज़ात अधूरी है
Ambreen Haseeb Ambar
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