तुम तो बेताब थे जगाने को पर मुझे नींद ही नहीं आई
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तेरी क़ुर्बत में उम्रभर रह कर मेरी अंतिम तलब मुहब्बत थी
Upendra Bajpai
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उस ने पूछा याद हमारी आती है कोई अपनी बर्बादी को भूलता है
Upendra Bajpai
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कितनी परियों की नसीहत ले कर ऐसी आँखें बनाई जाती हैं
Upendra Bajpai
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सोचा समझा इश्क़ नहीं करते हैं हम नादानों से नादानी हो जाती है
Upendra Bajpai
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तुम ने मेरी पेशानी पर होंठों से जो लिक्खा है सच बतलाऊँ ये दुनिया का सब सेे उम्दा मतला है
Upendra Bajpai
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