तुम ने कहा के चाहती थी तुम हमें बहुत तुम को हमारी चाह थी मतलब नहीं रही है प्यार आज भी वही, बदला है कुछ तो ये पहले तुम्हारी आरज़ू थी अब नहीं रही
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
128 likes
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
127 likes
अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
131 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
More from Dipendra Singh 'Raaz'
ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
सीने से मांँ लगाए ही रखती है रात भर रोता हुआ जो नींद से उठ जाऊँ मैं कभी
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
मैं कैसे चैन से सोऊँ यहाँ पर तेरी यादों से कमरा भर गया है
Dipendra Singh 'Raaz'
1 likes
सुनहरे ख़्वाबों से जिस मकाँ को सजाया था हम ने मिल के बरसों हमारे ख़्वाबों के उस मकाँ को लगा दी है आग ख़ुद ही उस ने
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
आए सही वो आए भले देर से यहाँ कितनी तो देर लगती है अजमेर से यहाँ
Dipendra Singh 'Raaz'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Dipendra Singh 'Raaz'.
Similar Moods
More moods that pair well with Dipendra Singh 'Raaz''s sher.







