तुम्हारी सोच में मिलते नहीं हम हमारी बात ही कुछ और है अब
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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यहाँ भी मैं तिरा दीदार करने की ख़ुशी में मिटा दूँगा अभी ये रार मरने की ख़ुशी में
Vishakt ki Kalam se
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ज़रूरी तो नहीं उस की हँसी में प्यार ही हो हँसी के इस जहाँ में और भी मतलब बहुत हैं
Vishakt ki Kalam se
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यहाँ आगे किसी की भी निशानी तो नहीं है कहीं ये वो अधूरी सी कहानी तो नहीं है
Vishakt ki Kalam se
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ज़रूरत ढूँढ़ लाती है पता मेरा मुझे अब इस पते से दूर जाना है
Vishakt ki Kalam se
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तू ही ज़रूरी हो गया है आज कल भोले मुझे अब थाम मेरे साथ चल
Vishakt ki Kalam se
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